ADS

Thursday, August 7, 2025

छांव वाली औरत

प्रस्तावना



उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बसा एक छोटा सा गांव है – मुंसियारी। चारों ओर से घने जंगलों और बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ ये गांव अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ एक रहस्यमयी कहानी के लिए भी जाना जाता है – "छांव वाली औरत" की कहानी।


घटना की शुरुआत (1982)


वर्ष 1982 की सर्दियों की बात है। गांव में एक अध्यापक नियुक्त हुए – राजीव मिश्रा, जिनकी नियुक्ति एक पहाड़ी स्कूल में हुई थी। राजीव लखनऊ से आए थे और शहर की चहल-पहल से दूर इस गांव में आकर बहुत कुछ नया अनुभव कर रहे थे।


एक दिन स्कूल से लौटते वक्त, रास्ते में एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ पड़ा। गांववालों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि "शाम ढलने के बाद उस पेड़ के नीचे मत जाना, वहां छांव नहीं, मौत मिलती है।" लेकिन राजीव ने इस बात को अंधविश्वास समझकर अनसुना कर दिया।


पहला सामना



एक दिन जब वे देर शाम स्कूल से लौट रहे थे, अचानक मौसम खराब हो गया। ठंडी हवाएं चलने लगीं और धुंध छाने लगी। मोबाइल उस समय नहीं होते थे, और टॉर्च की रोशनी भी कमजोर थी। तभी उस पेड़ के पास एक औरत खड़ी दिखी – सफेद साड़ी में, खुले बाल, और पीली आंखें।


वो बोली –

"साहब, मेरी बच्ची खो गई है... क्या आप मदद करेंगे?"


राजीव ने बिना सोचे-समझे हां कर दी। औरत जंगल की तरफ मुड़ी और बोली –

"आइए..."


राजीव ने उसका पीछा किया, लेकिन जैसे ही वह कुछ कदम चले, उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि वो औरत हवा में तैर रही है। उसका पांव ज़मीन से छू भी नहीं रहा था।



डर के मारे उन्होंने पीछे मुड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन रास्ता जैसे गायब हो गया था। जंगल में सिर्फ कोहरा था और किसी के रोने की आवाजें गूंज रही थीं।


चमत्कारिक बचाव


करीब 2 घंटे बाद जब गांव के लोग ढूंढने निकले, तो राजीव एक गड्ढे में बेहोश पड़े मिले। शरीर नीला पड़ चुका था, नब्ज बहुत धीमी थी। गांव के पुजारी ने बताया –

"वो 'छांव वाली' थी – इस पेड़ में रहने वाली आत्मा, जो हर साल एक इंसान को अपने साथ ले जाती है।"



राजीव को कई महीनों तक दौरे आते रहे। वह बार-बार एक ही बात कहते –

"वो मुझे बुला रही है… वो मेरी बच्ची कहती है…"


अंततः, राजीव ने नौकरी छोड़ दी और वापस लखनऊ चले गए। लेकिन गांववालों का कहना है कि राजीव ने कुछ महीनों बाद आत्महत्या कर ली, और मरने से पहले उन्होंने दीवार पर सिर्फ एक वाक्य लिखा –

"मैंने उसे वादा किया था…"


 आज भी डर ज़िंदा है


आज भी उस पेड़ के पास कोई शाम के बाद नहीं जाता। वहां एक छोटा मंदिर बना दिया गया है, जहां लोग दीपक जलाते हैं। लेकिन कई लोगों का कहना है कि कभी-कभी वहां एक औरत दिखती है, जो अपनी बच्ची को ढूंढ रही होती है…




छांव वाली औरत

प्रस्तावना उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में बसा एक छोटा सा गांव है – मुंसियारी। चारों ओर से घने जंगलों और बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ ये ...